जब धर्म डगमगाने लगे, जब सत्य दबने लगे,
जब मानवता खुद को ही खाने लगे —
तब फिर लौटता है कृष्ण… सिर्फ़ शब्द नहीं, युद्ध बनकर।
और सामने है कलियुग दानव — अंधकार का अवतार।
कलियुग दानव की दहाड़
मैं हूं कलियुग, तेरा अंत, तेरा डर, तेरा छल,
मैं वो वक़्त हूं जहाँ झूठ बोलता सच से तेज़, चल!
जहाँ धर्म बिके, और अधर्म ताज पहने,
जहाँ पाप हँसे और पुण्य आंखों से बह जाए ग़म से।
मैं वो राक्षस हूं जो शरीर में नहीं, सोच में बसता,
मैं हवा में हूं, मोबाइल में हूं, हर pixel में हँसता।
मैंने राजा को चोर, और भक्त को व्यभिचारी बनाया,
कृष्ण तू कहाँ है अब? देख, मैंने क्या कराया!
मैं हूं कृष्ण, नील वर्ण, पर भावों से स्वर्ण,
तेरे तम में चमकूं मैं, जैसे तिमिर में पूर्ण चंद्र।
मैं लौटता नहीं समय देख, मैं आता हूं जहाँ पुकार उठे,
जहाँ गीता भूली जाए, वहाँ मैं फिर से विचार लाऊं।
तेरा अभिमान तेरा शस्त्र है, मेरा प्रेम ही अस्त्र है,
तू तोड़ता रिश्ते, मैं जोड़ूं आत्मा के स्वर से।
तू डर फैलाए, मैं सत्य का दीप जलाऊं,
तेरे हर छल को, मैं सुदर्शन से मिटाऊं।
कलियुग बोले – “तेरे युग की बातें पुरानी हैं,
आज तो Insta पे रीलें, और trending कहानी है।”
कृष्ण बोले – “trend से धर्म नहीं चलता,
सत्य भले ट्रेंडिंग ना हो, पर काल को वो ही बदलता।”
कलियुग हँसे – “भक्त खुद भ्रम में हैं, धर्म को लेकर लड़ते,
मेरे ही नाम पर मंदिर जला, और भाई-भाई से डरते।”
कृष्ण बोले – “तेरे बहकावे में हैं सब, मैं फिर से सिखाऊंगा,
गीता की एक-एक बात, अब गीत में गाऊंगा।”
"कर्म करो, फल की चिंता मत कर", मैंने कहा था,
पर तूने कर्म को ही भुला, बस लालच दिखाया था।
आत्मा अमर है, ये ज्ञान तूने छीन लिया,
अहंकार का जहर हर दिल में तूने घोल दिया।
जहाँ नारी देवी थी, वहाँ तूने उसे माल बना दिया,
जहाँ शब्द पूजा थे, वहाँ तूने गाली बना दिया।
मैं अर्जुन को रण में खड़ा करूं, और उठाऊं गदा फिर से,
तेरा हर तामसिक illusion चीर दूं जैसे फाड़ा कालिया के फन से।
कलियुग का जवाब — घमंड और ठहाके]
“कृष्ण! तेरे flute की धुन अब नहीं सुनाई देती,
आज bass और beats हैं, ज्ञान की बातें फेंकी जाती हैं जैसे रद्दी।
तेरा धर्म हार गया, तू कथा बनकर रह गया,
तेरे नाम पे भी अब politics चलती है, ये देख क्या रह गया!”
“अब ना कोई अर्जुन है, ना कोई गीता समझने वाला,
सब busy हैं followers में, दिल कोई भी ना टटोलने वाला।”
कृष्ण
कलियुग चिल्लाया – “मैं अमर हूं! मैं हर मन में घर हूं!”
कृष्ण बोले – “पर तेरा अंत सत्य की नजर हूं।”
“तू रहेगा पर छुपकर, अब नहीं खुले आम,
अब जागेगा इंसान, अब सत्य बनेगा काम।”
तेरे मोबाइल में गीता बजेगी, तेरे memes में ज्ञान होगा,
तेरे पोस्ट में अब विचार, ना कि बस दिखावा होगा।
तू रहेगा पर कमजोर, क्योंकि मैं अब जागा हूं,
हर आत्मा में कृष्ण, ये तू भूल गया दानव तू कौन सा भागा है?
मैं कृष्ण हूं — ना समय से बंधा, ना सीमाओं से,
मैं वो विचार हूं जो काल को मोड़ दे दिशा में नए उजालों से।
कलियुग तू हारा नहीं, पर झुका ज़रूर,
क्योंकि जब भी छल बढ़े, मैं आऊं ज़रूर।
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