तू ही तू हर जगह आजकल क्यूँ है
रास्ते हर दफ़ा, सिर्फ़ तेरा पता
मुझसे पूछे भला क्यूँ है
एक पल प्यार का ज़िन्दगी से बड़ा
ऐसा मेरे खुदा क्यूँ है
तू ही तू हर जगह…
सूना-सूना मन का है कोना
सूना-सूना तेरे बिन होना
हर कहीं पर तू है, तू नहीं पर तू है
ओ बेखबर, तू है हर मोड़ पर
इतना तो बता, मौसमों की तरह
तू बदलता गया क्यूँ है
तू ही तू हर जगह…
तेरी-मेरी बाकी है कहानी
तेरी-मेरी आधी है कहानी
आ गई वो मोड़ पर, तू गया जो छोड़ कर
मेरे दिल को तोड़ कर, क्या मिल गया
पास हो तो बुरा, दूर हो तो बुरा
ऐसा मेरे खुदा क्यूँ है
तू ही तू हर जगह…
तू ही तू हर जगह आजकल क्यूँ है
रास्ते हर दफ़ा, सिर्फ़ तेरा पता
मुझसे पूछे भला क्यूँ है
ना मैं अपना रहा, ना किसी और का
ऐसा मेरे खुदा क्यूँ है
तू ही तू हर जगह…
धीमी-धीमी आँच पे जैसे
धीरे-धीरे जलता है दिल
ये बेक़रारी क्यूँ है, ये खुमारी क्यूँ है
आवारगी क्यूँ है, हर मोड़ पर
ना मैं अपना रहा…
हुआ नहीं पहले कभी ये
छुआ नहीं दिल को किसी ने
हर आरज़ू तू ही, चैन-ओ-सुकूँ तू ही
मैं तो कहूँ तू ही है ज़िन्दगी
ना मैं अपना रहा…