चाँद की चांदनी में, सूनसान रात में,
गरीब लड़का खोया, ख्वाबों की बात में।
वो लड़की, एक सपना, जो दिल में बस गई,
हर धड़कन में उसकी, बस यादें सज गई। वो रेत का मकान, टूटी सी चौखट,
फिर भी आँखों में बस्ती, उसकी वो मुलाकात।
चाँद को तकता है, वो रातों को जागकर,
उसकी मुस्कान की खातिर, दिल को बेकरार कर। वीराने में अकेला, ना कोई साथी पास,
बस यादों का मेला, और आँसुओं की प्यास।
वो लड़की जो दूर है, शायद अनजान है,
फिर भी उसका चेहरा, इस दिल की जान है। हवाएँ गुनगुनातीं, उसकी बातें सुनातीं,
पर गरीबी की दीवारें, सपनों को ठुकरातीं।
फिर भी वो चाँद को देखे, हर रात बेकरार,
उस लड़की की याद में, जलता रहे ये प्यार।