Verse 1)
रास्ते धुंधले, मंज़िलें दूर कहीं,
ख़्वाबों की चादर में छुपा हर यक़ीन।
आँखों में धुआँ, दिल में है तूफ़ान,
जिन्हें कहा दोस्त, वही निकले बेईमान।
चुप हूँ मगर अंदर चल रही है जंग,
हर लफ़्ज़ में छुपा है मेरा अधूरा रंग।
ज़िंदगी की किताब, पन्ने फटे हुए,
पर मैंने हर दर्द को गीतों में गढ़े हुए।
(Hook)
चलते रहो, चाहे राहें हों मुश्किल,
हर ठोकर में छुपा है नया एक फ़साना दिलचस्प।
ये दर्द भी है गुरूर, हौसले का नक़्शा,
मैं गिरा जितनी बार, उठ खड़ा हुआ सच्चा।
(Verse 2)
बीते लम्हों के साये, पीछा करते रोज़,
ख़्वाहिशों का बोझ, पर दिल है थोड़ा ओवरडोज़।
शहर की आवाज़ों में ढूंढता मैं सुकून,
पर हर गली में गूंजता है मेरा ही जूनून।
ना मुक़द्दर का गिला, ना किस्मत का हिसाब,
मेरे क़दमों के निशान, हैं मेरी असली किताब।
सच बोलूँगा, चाहे जल जाए जहां,
क्योंकि दिल से जो निकले, वही बनता है बयान।
(Hook Repeat)
चलते रहो, चाहे राहें हों मुश्किल,
हर ठोकर में छुपा है नया एक फ़साना दिलचस्प।
ये दर्द भी है गुरूर, हौसले