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[Opening Alaap – slow, haunting]
आह… ओह्ह…
या रब… या रब…
दिल टूटा है… दिल टूटा है…
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(Verse 1)
ये कैसा इम्तिहान है तेरा,
हर सांस में नाम है तेरा…
माँगी थी रोशनी ज़िंदगी से,
मिला तो बस अंधकार ही मेरा…
(Chorus – soulful call)
या रब… या रब… सुन ले पुकार मेरी,
टूटे हुए दिल की आवाज़ सुन ले…
या रब… या रब… मैं तो ख़ाक बना,
अब तू ही राख से साँसें चुन ले…
(Alaap – pain-filled)
आह्ह… या इलाही…
तेरा बन्दा तन्हा… तेरे दर पे है खड़ा…
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(Verse 2)
सपनों की मिट्टी में ख़ून मिला है,
हर वादा अब धुएँ सा उड़ा है…
जो भी मिला, पल में बिछड़ गया,
लगता है खुदा भी खफा हुआ है…
(Chorus – rising intensity)
या रब… या रब…
कह दे बस एक करम,
दिल को चैन मिले, रोह को सुकून मिले…
या रब… या रब…
तू ही है मंज़िल, तू ही सफ़र,
और तू ही आख़िरी हमसफ़र…
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(Bridge – spiritual moment)
ना शिकवा है, ना गिला अब कोई,
तेरी मर्ज़ी में सब छुपा है कोई।
मैं टूटा सही, मगर झुका नहीं,
क्योंकि तू ही है जो दिल में बसा है कोई…
(Final Alaap – fading prayer)
या रब… या रब…
दिल टूटा है… पर तू ही है सबब…
तेरे नाम पे ही… साँसें हैं अब…
या रब… या रब…