[Verse]
सफेद कुर्ता, मखमली टोपी, हाथ में पान का बीड़ा,
सबके आगे जी-जी कहना, पीछे मुँह है टेढ़ा।
साहब की कुर्सी के पीछे, मक्खी जैसे भिनभिनाते,
अपनी अक्ल बेच के खाते, तलवे खूब चाटते।
[Chorus]
चमचों के पप्पा आए हैं,
रास्ता छोड़ो भाई।
जी हुज़ूरी का ये चश्मा,
कैसी शामत आई।
चमचों के पप्पा आए हैं,
रास्ता छोड़ो भाई।
[Verse]
बॉस की हर एक छींक पे, जो सौ बार "जी" बोले,
अपने घर की इज़्ज़त को, जो बीच बाज़ार तोले।
बिन पेंदे का लोटा बनकर, इधर-उधर है लुढ़कना,
शर्म-हया को खूँटी पे टाँग, बस साहब के पीछे डोलना।
[Chorus]
चमचों के पप्पा आए हैं,
रास्ता छोड़ो भाई।
जी हुज़ूरी का ये चश्मा,
कैसी शामत आई।
चमचों के पप्पा आए हैं,
रास्ता छोड़ो भाई।
[Verse]
अपना कोई वजूद नहीं, बस साये के पीछे भागें,
दुनिया सोती रहती है, ये साहब के साथ जागें।
चाटुकारी की ये महफ़िल, रोज़ नया इक ड्रामा,
उतर गया है चेहरा इनका, फट गया है पाजामा।
[Chorus]
चमचों के पप्पा आए हैं,
रास्ता छोड़ो भाई।
जी हुज़ूरी का ये चश्मा,
कैसी शामत आई।
चमचों के पप्पा आए हैं,
रास्ता छोड़ो भाई।
[Outro]