Verse 1
हर मोड़ पे रुकना, वो मेरी फितरत में नहीं,
सपनों का पीछा करता, रुकना सीखा ही नहीं।
हर दर्द को सीखा, हर चोट को अपना,
ज़िंदगी का फलसफा, बस यही है सपना।
Chorus
उठा के खुद को गिरने ना दूँगा,
लहरों से टकरा के खुद को खोने ना दूँगा।
सपनों की आग में जलने दो मुझको,
इस जंग में कभी हारने ना दूँगा।
Verse 2
हर रात के अंधेरे में पाया मैंने सवेरा,
तकलीफ़ों की ये आग ही बनेगी मेरा बसेरा।
कदम कदम पे मिले मुझे कांटे ये सफर में,
पर हर ठोकर ने बस बढ़ाया मुझे अपने हुनर में।
Chorus
उठा के खुद को गिरने ना दूँगा,
लहरों से टकरा के खुद को खोने ना दूँगा।
सपनों की आग में जलने दो मुझको,
इस जंग में कभी हारने ना दूँगा।
Bridge
किस्मत ने दी नहीं, मेहनत से पाया है,
अपने दम पे खुद को इस मुकाम तक लाया है।
वो कहते हैं हार जाओगे, मैं कहता हूँ देखो,
कदमों तले जमीन को आज मैंने झुकाया है।
Outro
अब ना रुकना, ना झुकना, ये मेरा वादा है,
हर मुश्किल से भिड़ूँगा, खुद पे ये इरादा है।
जीत मेरी होगी, चाहे जो हो नसीब,
मेहनत ही मेरा धर्म, और यही मेरा नसीब।