(Hook)
ओ भाया के चालै सै,
घणा बुरा हालै सै,
मेहनत करण आला देख,
फिर भी खाली थालै सै।
ओ भाया के चालै सै,
घणा बुरा हालै सै,
बदलणा पड़ैगा सबने,
यही असली सवालै सै।
(Verse 1)
नौकरी की लाइन लम्बी, सपने हो रे चूर,
पढ़-लिख के बैठ्या छोरा, फिर भी मजबूर।
महंगाई की मार पड़ै, जेब हो गई खाली,
रोटी का जुगाड़ करै, हर घर की घरवाली।
टीवी पे शोर मचै, मुद्दे सारे दब जां,
सच बोलण आला देख, लोग उसपे चढ़ जां।
जात-पात के चक्कर में भाईचारा खोया,
इंसानियत का पौधा भी धीरे-धीरे रोया।
(Hook)
ओ भाया के चालै सै,
घणा बुरा हालै सै,
मेहनत करण आला देख,
फिर भी खाली थालै सै।
(Verse 2)
पेड़ कटैं दिन-रात, धूप और बढ़ जावे,
गंदा होया पानी, बीमारी घर आवे।
स्कूल में पढ़ाई हो, छोर्या ने ज्ञान मिले,
मेहनत का फल सबने, बराबर सम्मान मिले।
नेता भी जवाब दें, जनता सवाल करे,
देश की तरक्की खातिर हर कोई ख्याल करे।
धर्म तै ऊपर उठ के शिक्षा पे ध्यान हो,
तभी तो अपने भारत की अलग पहचान हो।
(Outro)
नफरत छोड़ भाई, प्यार की बात कर,
अपने गांव-देश खातर कुछ जज्बात कर।
मिलके कदम बढ़ावां, बदल जावे हाल,
फेर कहेंगे सब मिलके — बढ़िया सै कमाल!