अंधेरे का राही, वो था सच्चा सिपाही,
अपनों की खातिर, जिसने लिख दी तबाही।
आँखों में शेयरिंगन, दिल में भरा था प्यार,
परछाई में जीया, वो उचीहा का मददगार।
हाँ, वो था इताची... सच्चा उचीहा इताची।
वर्स 1 (Verse 1)
बचपन से ही था वो सबसे जुदा,
जिसकी बुद्धि के आगे, हर कोई झुका।
देखा था युद्ध का उसने वो मंज़र,
शांति की चाह में, उठाया खुद पर खंज़र।
गाँव को बचाना था, या चुनना था खानदान,
भारी था फैसला, दांव पर था जहान।
चुना उसने फर्ज, दिल पर पत्थर रख कर,
अपनों का लहू बहाया, रोया वो छुप-छुप कर।
वर्स 2 (Verse 2)
छोड़ दिया घर-बार, बन गया वो गद्दार,
अकात्सुकी (Akatsuki) की ओट में, ढूँढता रहा राह।
पर असली मकसद था, बस एक ही यार,
छोटा भाई सास्के रहे हमेशा महफूज़ और होशियार।
नफ़रत की आग में, भाई को तपाया,
ताकि बन सके वो ताकतवर, ये खेल रचाया।
बीमारी से टूटता शरीर, फिर भी खड़ा रहा,
सास्के के हाथों मरने का, वो ख़्वाब बुन रहा।
(कोरस)
अंधेरे का राही, वो था सच्चा सिपाही,
अपनों की खातिर, जिसने लिख दी तबाही।
आँखों में शेयरिंगन, दिल में भरा था प्यार,
परछाई में जीया, वो उचीहा का मददगार।
वर्स 3 (Verse 3)
अंतिम वो लड़ाई, और आँखों में था पानी,
उंगलियों से माथे को छूकर, ख़त्म की कहानी।
"माफ़ करना सास्के, ये आखिरी बार है,"
इस एक वाक्य में छिपा, भाई का प्यार है।
पुनर्जन्म (Edo Tensei) में आया, तो फिर से दिखाया,
गाँव के लिए उसने, अपना सब कुछ लुटाया।
कोनोहा का वो हीरो, जिसे दुनिया ने कोसा,
पर उसने कभी नहीं खोया, खुद पर भरोसा।
आउट्रो (Outro)
काले कौवों का साया, और लाल वो आँखें,
इताची की दास्तान, बयां करती हैं रातें।
नायक था वो, खलनायक के भेष में,
अमर रहेगा वो, हर एनिमे (Anime) के देश में।
हाँ, अलविदा इताची... कोनोहा का असली रक्षक।