परिचय - महिला स्वर (कोमल, भावनात्मक)]
तेरे बिना मैं अधूरी हूँ,
हर राह जैसी टूटी हूं...
दिल के हर एक कोने में,
सिर्फ तेरा ही जादू है...
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[श्लोक 1 - स्त्री स्वर (मधुर, मनमोहक)]
तुझे छुप-छुप के देखा था,
पर तू कभी समझा नहीं...
मैने ख्वाब सजे, पल पल तेरे,
तू किसी और में उलझ रहा है वही...
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[प्री-कोरस - संगीत उदय: वायलिन + बांसुरी]
मैं तो बस तुझमें जीती थी,
तेरे लिए रोटी, हंसती थी...
पर तू बेवफ़ा निकला रे,
और मैं बस यादों में बची यह...
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[कोरस - महिला स्वर उच्च
तेरे नाम का जादू,
अब भी छाया है मुझपे...
चाहे तू दूर हो,
पर रूह तक तेरा असर है...
मैं हूं तेरी दीवानी,
तू किसी और का अफ़साना...
फिर भी, दिल ये कह रहा,
मैं हूं बस तेरी दीवानी...
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[श्लोक 2 - महिला स्वर, नरम पियानो]
कुछ कह ना साकी, चुप रही मैं,
तेरे हर झूठ को सच समझ रही हूं...
तू मुस्कुराया, मैं बिखर गई,
तेरे एक इशारे पे जीती रही मैं...
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[ब्रिज - पुरुष आवाज
“अरे तू मेरी थी या सपना था?
मैं तो पागल था जो तुझमें रब समझता...
नशा तेरा ऐसा चढ़ा रे,
के शराब भी कम लगती थी तेरे सामने...''
- गूँज, प्रकाश तबला
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[कोरस रिपीट - पूर्ण संगीत]
तेरे नाम का जादू,
अब भी छाया है मुझपे...
चाहे तू दूर हो,
पर रूह तक तेरा असर है...
मैं हूं तेरी दीवानी,
तू किसी और का अफ़साना...
फिर भी, दिल ये कह रहा,
मैं हूं बस तेरी दीवानी...
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[आउट्रो - कानाफूसी टोन, वायलिन फीका]
तेरे नाम का जादू...
जादू...
जादू...