है.............
ख़ामोशियों में छुपा इक राज़ है,
ज़िंदगी बस एक आवाज़ है।
हर साँस उधार में ली हुई,
हर धड़कन की कोई बाज़ी है।
मौत ही हक़ है — यही फ़ैसला,
बाकी सब तो धोखा, तमाशा, हवा।
जिसने इसे समझ लिया सच्चा,
वो ही पा गया ख़ुदा का पता।
रूह को डर नहीं उस अंजाम से,
वो तो लौटती है अपने नाम से।
जिसने इश्क़ किया बेनाम होकर,
वो जी उठा मरने के बाद भी तमाम होकर।
मौत ही हक़ है — यही सुकून का रास्ता,
वही दर है जहाँ मिलता है वास्ता।
फ़ना में ही तो बसी है ज़िंदगी,
और उसी में मिलता है असली ख़ुदा।