🎶 Verse 1:
राख से उठता है एक प्राण नया,
धरा पे फैला उजियारा,
भक्ति बनी है अब अस्त्र प्रबल,
सुनो गगन का जयकारा।
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🎶 Verse 2:
संघर्ष की लहरों में तपता मन,
विश्वास की शिखा सदा जले,
हर दर्द बना अब शक्ति का रूप,
अधर्म की दीवारें ढहें।
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🎶 Chorus:
शक्ति जग उठी है, शौर्य गरजा है,
अंधकार भागा, प्रकाश फिर छा गया!
हर प्राण पुकारे आरम्भ का नाम,
जय हो उस योद्धा का धाम!
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🎶 Verse 3:
आसमान में जले दीप सहस्र,
धरती गाए विजयी गीत,
भक्ति से जागे वो परम तेज,
अब न रुकेगा आरम्भ का मीत।
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🎶 Outro (soft, divine fade):
शांति में गूंजे शंख की तान,
देव भी बोले “धर्म महान”,
जो झुका नहीं, वो अमर हुआ —
आरम्भ का युग फिर सजा।