न ज़रा भी बदल सके हम तो
जाने किस मिट्टी के बने हम तो
न ज़रा भी बदल सके हम तो
जाने किस मिट्टी के बने हम तो
सब को यूँ आइना दिखाएँ हम
सब को यूँ आइना दिखाएँ हम
जैसे ख़ुद दूध के धुले हम तो
जैसे ख़ुद दूध के धुले हम तो
न ज़रा भी बदल सके हम तो
दो घड़ी चैन मिल भी जाए अगर
दो घड़ी चैन मिल भी जाए अगर
रह नहीं सकते चैन से हम तो
रह नहीं सकते चैन से हम तो
न ज़रा भी बदल सके हम तो
ऐसी आदत हमें भटकने की
ऐसी आदत हमें भटकने की
आ नहीं सकते राह पे हम तो
आ नहीं सकते राह पे हम तो
न ज़रा भी बदल सके हम तो
जाने किस मिट्टी के बने हम तो