(अंतरा 1)
सवेरे सवेरे हवा में, तेरी किरणें झिलमिलाएँ,
सूरज तू जो छू ले दिल को, सपनों के रंग जगाएँ।
राहों पर तेरी गर्मी, मेरे कदम सँभालती,
तेरी रोशनी से दुनिया, हर पल नई सी लगती।
(कोरस)
ओ सूरज, ओ सूरज, चमकता रह सदा,
तेरी रोशनी में मिलता है जीने का मज़ा।
ओ सूरज, ओ सूरज, दिल को दे तू उड़ान,
तेरे बिना है अधूरी, हर एक सुबह की जान।
(अंतरा 2)
दोपहरी की धूप तेरी, जैसे कोई आग का नृत्य,
पर दिल में देती ताकत, हर मुश्किल का ये उपचार।
तेरे संग खिलते फूल, तेरे संग धड़कते पल,
सूरज तू ही है साथी, तू ही है मेरा संबल।
(कोरस)
ओ सूरज, ओ सूरज, चमकता रह सदा,
तेरी रोशनी में मिलता है जीने का मज़ा।
ओ सूरज, ओ सूरज, दिल को दे तू उड़ान,
तेरे बिना है अधूरी, हर एक सुबह की जान।
(ब्रिज)
तेरी किरनों में छुपी है, उम्मीदों की बात,
रात के बाद हर पल, तू ही देता नई बारात।
सूरज तू मुस्कुराता, तो धरती भी खिल उठे,
तेरा प्यार सुनहरा, दिल को फिर से छू उठे।
(कोरस – फ़ाइनल)
ओ सूरज, ओ सूरज, चमकता रह सदा,
तेरी रोशनी में मिलता है जीने का मज़ा।
ओ सूरज, ओ सूरज, दिल को दे तू उड़ान,
तेरे बिना है अधूरी, हर एक सुबह की जान।