

Prompt / Lyrics
निरंकार है सच्चा साथी, हरदम संग मेरे रहता है, दुख की काली रातों में भी,दीपक बनकर जलता है। अंतरा 1: जब-जब दुनिया ने ठुकराया, हाथ उसी ने थामा है, डगमग होती नैया को भी, प्यार से पार लगाया है। भीड़ भरे इस जग में उसने, मुझको गले लगाया है, सूने मन के आँगन में वो, खुशियों सा मुस्काता है। निरंकार है सच्चा साथी… ना कोई दूरी, ना मजबूरी, ना ही उसकी परछाई है, साँस-साँस में बसा हुआ है, कायम यह सच्चाई है। मैं गिर जाऊँ लाख दफ़ा भी, वो संभालने आता है, मेरे हर इक अश्क को अपने आँचल में छुपाता है। माया झूठी, जग है सपना, सब कुछ आना-जाना है, सच्चा नाता बस उसी से, बाकी सब बेगाना है। "हरबीर" कहे बस इतना काफी, नाम जो उस का जपता है, निरंकार है सच्चा साथी, हरदम संग मेरे रहता है।
Tags
rock
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No
4/7/2026