तुम एक, तुम एक, तुम एक मानते क्यों नहीं
हिमांशु, तुम्हारी बातें मेरे दिल को छूती हैं
तुम एक, तुम एक, तुम एक मानते क्यों नहीं
तुम्हारी मुस्कान मेरे दिन को रोशन कर देती है
तुम एक, तुम एक, तुम एक मानते क्यों नहीं
हिमांशु, तुम्हारी आवाज़ मेरे कानों में गूंथती है
तुम एक, तुम एक, तुम एक मानते क्यों नहीं
तुम्हारी बातें मेरे दिल को समझाती हैं
तुम एक, तुम एक, तुम एक मानते क्यों नहीं
हिमांशु, तुम्हारी मोहब्बत मेरे जीवन को अर्थ देती है