झूठ, कपट निंदा को त्याग करो।
हर प्राणी से प्यार करो।
घर पर यदि कोई अतिथि कोई तो यथा शक्ति सत्कार करो।
भोले इतना दीजिए जामे कुटुम्ब समा जाए। मैं भी भूखा न रहूँ और साधु भी भूखा न जाए।
पता नहीं किस रूप में आकार शिव-शंकर मिल जाएँगा
निर्मल मन के दर्पण में ही महाकाल के दर्शन पाएगा।