वह थे दाता, जिसने माँगा नहीं हिसाब,
प्यार दिया ख़ुद, और बाँट दिया हर ख़्वाब।
मेहनत का फल, उन्होंने हम सब में रखा,
अपना जीवन देकर, हमें हर सुख चखा।
उन्हें फ़िक्र थी, जब फ़ोन मेरा उठ न पाता,
पर जानती हूँ, दिल में तो बस स्नेह ही था आता।
ख़ुद के लिए कुछ न किया, बस देते ही रहे,
इस घर की हर ईंट में, आज भी वो ही बसे।
हाँ, वो चले गए, पर उनका देना बाकी है,
इस दुनिया में मेरी, अब उनकी साकी है।
उनकी राह पर चलूँ, यही मेरा काम है,
हर साँस पर मेरे, बस पापा का नाम है
वह थे दाता, जिसने प्यार का हर बीज बोया,
हमारे लिए सब किया, ख़ुद के लिए सब खोया।
बचपन से मेहनत की, एक विरासत छोड़ गए,
हर ख़ुशी, हर सुविधा, हमारे नाम कर गए।
हाँ, फ़िक्र होती थी जब फ़ोन मेरा उठ न पाता,
पर जानती हूँ, दिल में तो बस स्नेह ही था आता।
वो पल, जब घर में सब, ख़ुशियों से भर जाते,
पापा की खुली हँसी से, हमारे दिन संवर जाते।
और हँसते थे वो सबसे ज़्यादा, मम्मी की धुन पर,
जब पूजा में गाती थीं भजन, चढ़कर अपनी सुर पर।
उनका देखना, फिर प्यार से मुस्कुराकर आँख मारना,
इस मासूमियत पर, था उनका दिल हारना।
आज सब कुछ है, जो आपकी मेहनत से बना,
बस कमी खलती है, उस प्यार और उस हँसी की गुना।
उनकी राह पर चलूँ, यही मेरा कर्तव्य है,
हर साँस पर मेरे, बस पापा का अस्तित्व है।