"क्यों खाते हो लाशें?" (Rap Against Non-Veg People)
[Intro]
Yo… ये उनकी चीखें हैं,
जो बोल नहीं सकते, पर दर्द सहते हैं…
तू कहे स्वाद, मैं कहूँ गुनाह,
तेरी थाली में सजी है मौत की राह…
[Verse 1]
तेरी थाली में जो रखा है, वो कभी साँस लेता था,
तेरी भूख के लिए किसी का परिवार रोता था।
आँखों में डर, वो काटा गया,
तेरे लिए दर्द से नहाया गया।
कैसा ये स्वाद जो चीखों से भरा?
कैसी ये भूख जो क़त्ल से सजा?
कभी सोचा, जो ज़िंदा था कल,
आज तेरी प्लेट में क्यों बेजान पड़ा?
[Chorus]
क्यों खाते हो लाशें? (क्यों?)
कैसे लगता है ये सही? (कैसे?)
इंसान होकर इतना बेरहम,
क्यों बना तू पाप का कारण?
[Verse 2]
गीता कहे "अहिंसा परमो धर्मः"
फिर क्यों तू बना राक्षस आज?
सबमें बसा है ईश्वर का नाम,
फिर क्यों तूने किया ये काम?
कहते हो "प्रकृति का नियम" ये,
पर असल में ये बस बहाना है।
जंगल में बिना हथियार जा,
फिर देख, तू खुद शिकार बन जाएगा।
[Chorus]
क्यों खाते हो लाशें? (क्यों?)
कैसे लगता है ये सही? (कैसे?)
इंसान होकर इतना बेरहम,
क्यों बना तू मौत का कारण?
[Outro]
अब भी वक़्त है, करले पश्चाताप,
वरना मिलेगा कर्म का जवाब।
धरती पर सबका जीने का हक़,
रख तू करुणा, न कर ये खून का पथ।
—— Preet