बड़ी शान से वो, ये कहने खड़े हैं,
सभी दिखते छोटे, हम ही बड़े हैं।
बिन मुद्दे की बैठक करने, छुट्टी के दिन बैठे हैं,
भीड़ जुटाकर कमरे में वो, कुर्सी पर ही ऐंठे हैं।
काम नहीं कर बात बनाते, भीड़ से बस लड़े हैं,
बड़ी शान से वो, ये कहने खड़े हैं,
सभी दिखते छोटे, हम ही बड़े हैं।
कागज भेजा पढ़ने को तो, वापस पाना मुश्किल है,
कुर्सी तोड़ें दफ्तर में वो, सोना जिसमें शामिल हैं।
आवाज ऐसी उनसे निकले मगर, असल में औंधें घड़े हैं,
बड़ी शान से वो, ये कहने खड़े हैं,
सभी दिखते छोटे, हम ही बड़े हैं।
नियमों को वो ताक पे रख, उल्लू बैठाते शाखो पर,
गलत काम की बीन सुनाकर, खेल रहे हैं लाखों पर।
चोर लगा कुर्सी पर बैठा, बेइज्जत हो के पड़े हैं,
बड़ी शान से वो, ये कहने खड़े हैं,
सभी दिखते छोटे, हम ही बड़े हैं।