क्या कहता है ज़माना, फ़र्क नहीं पड़ता
आशिक या दीवाना, फ़र्क नही पड़ता
ले जाऊं मैं तुम्हें घुमाने कहीं, मारे कोई ताना
फ़र्क नहीं पड़ता, जी हां ! फ़र्क नहीं पड़ता
तुम भागोगे घर से, नाम मैरा लेकर
तुम कांपोगे डर हें , साथ मैरे होकर
कहीं पकड़े ना जाओ, खयाल तुम ये रखना
अब्बू को नाम तुम मैरा, बता मत देना
मैं भागा-भागा फिर रहा हूं, ज़माने से छुपकर
फैरे तुम जल्दी कर रही हो, पंडित के कहनें पर
अब्बू ने तेरे मुझको यहां , जेल करवा दी
पंडित ने किसी और से, तैरी मांग भरवां दी
हाए ये क्या हुआ, ये क्या हुआ ये क्या हुआ
तुझको दुल्हा बनना था, बच्चो का मामू हुआ
हाए ये क्या हुआ, ये क्या हुआ ये क्या हुआ
अपनी ही बीवी का तू, भाई हुआ
हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा
वो बोली
भैया मैरे राखी के बंधन को निभाना
भैया मैरे राखी के बंधन को निभाना
मामू बनने का फ़र्ज़ तुम निभाना
मामू बनने का फ़र्ज़ तुम निभाना
हा हा हा
हा हा हा
हंसो मत,
iam so sad yaar