कभी तन्हाइयों में भी हमारी याद आएगी,
ख़ामोश लम्हों में कोई सदा आएगी।
जो बातें हमने आधी-अधूरी छोड़ दीं,
वो हर शाम तेरी आँखों में लौट आएगी।
चाँदनी जब तेरे आँगन में उतर आएगी,
हवा तेरी ज़ुल्फ़ों को छूकर जाएगी।
उस हल्की सी सरसराहट में भी,
हमारी कोई मीठी शिकायत आएगी।
वो गलियाँ जहाँ संग गुज़रे थे हम,
अब भी तेरे कदमों को पुकारेंगी।
दरख़्तों की शाखें झुकी रह जाएँगी,
तेरी तन्हाइयाँ जब हमें टटोलेंगी।
रातों की ख़ामोशी जब बोलने लगेगी,
चाँदनी भी तेरा दर्द खोलने लगेगी।
टपकेंगे आँसू तेरी पलकों के किनारों से,
दिल की दीवारों पे हमारी सदा आएगी।
जब आईना तेरा अक्स देखेगा,
उसमें कहीं मेरी तस्वीर आएगी।
और तब, मेरी हर बात, हर अहसास,
तेरे दिल की गहराइयों में समा जाएगी।
कभी चाहोगे रोकना इस बहते वक़्त को,
तो मेरी धड़कन की हलचल सुनाई देगी।
हर साये में, हर ग़ज़ल की ख़ुशबू में,
कभी तन्हाइयों में भी हमारी याद आएगी।