"बचपन से जवानी तक"
खुले आसमान के नीचे,
सपनों के थे बहाने।
वो हंसी के प्यारे पल,
अब क्यों लगें अनजाने?
ओ बचपन से जवानी का सफर,
हंसी और आंसुओं का समंदर।
पीछे छूटे वो मासूम पल,
आगे बढ़ने की नई पहल।
फिर भी दिल में है उम्मीद,
सपनों की चमक न हो मट्टीत।
ओ सफर ने हमें सिखाया,
हर दर्द ने हमें सजाया।