अंतरा 1)
तेरे बिना अधूरा मैं, जैसे कोई साया धूप में,
तू मुस्कुराए तो लगे, खिला हूँ मैं इस रूप में।
तेरी बातें, तेरी यादें,
हर लम्हा बस तुझसे जुड़ा,
तेरे बिना जो सांसें लीं,
वो भी जैसे अधूरा लिखा।
(मुखड़ा)
तेरे होने से, है ज़िंदगी में रंग नया,
तेरी धड़कन पे धड़कता दिल मेरा।
तेरे होने से, है सुकून हर दर्द में,
अब तो हर पल तुझमें ही खोया मैं।
(अंतरा 2)
सपनों में आता है तू, चाँदनी बनके हर रात,
तेरे होंठों की हँसी से, मिट जाए हर आघात।
तेरे कदमों के निशाँ हैं, इस दिल की राहों में,
तेरे नाम की खुशबू बसती, मेरी हर चाहों में।
(मुखड़ा दोहराव)
तेरे होने से, है ज़िंदगी में रंग नया,
तेरे प्यार में ही मेरा जहाँ सजा।