माँ के आँचल में छुपा सुकून का संसार,
पापा के कंधे पे था मेरा पूरा आसमान।
बचपन में जो सीखा, वो प्यार था निशान,
उनकी हँसी में बसी थी मेरी पहचान।
माँ की ममता हर दर्द सह लेती थी,
पापा की मेहनत मेरी राहें गढ़ देती थी।
जब गिरा मैं कभी, तो माँ ने थामा,
पापा ने कहा – “चल बेटा, तू फौलाद है सच्चा।”
आज जब दूर हूँ, हर लम्हा याद आता है,
वो दाल की खुशबू, वो छत पे नींद का नाता है।
माँ का गुस्सा भी ममता में भीगा होता था,
पापा का सन्नाटा भी सब कुछ कह जाता था।
ना कोई फरिश्ता माँ-पापा जैसा होगा,
ना कोई दुआ उनके बिना पूरा होगा।
जितना कहूँ, उतना कम लगे,
माँ-पापा का प्यार तो खुदा से भी ऊपर ठहरे।