जय जय मणि नागेश्वरी माता,
तेरे चरणों में सुख की बरसाता।
भक्तों के संकट हर लेती,
माँ तू ही भवसागर तरसाता।।
अंतरा 1:
नागेश धाम में ज्योति जलाए,
भक्त तेरा नाम सदा गाए।
मणि सी शोभा तेरी मूरत,
देखे जो जन मन हरषाए।।
अंतरा 2:
दीन दुखी की रखवाली करती,
भक्ति से तुझको माँ जो सरसती।
तेरे बिना न और सहारा,
तू ही तो जग की पालनहार।।
अंतरा 3:
भक्ति-सुमन हम अर्पण लाए,
तेरे चरणों में शीश झुकाए।
मणि नागेश्वरी माँ वर दे,
सदा सुख-शांति जीवन छाए।।
मुखड़ा (दोहराएँ):
जय जय मणि नागेश्वरी माता,
तेरे चरणों में सुख की बरसाता।।