रात की चादर में, चुपके से,
आई थी बारिश फिर से,
हर बूँद में, हर आहट में,
तेरी यादों की गूँज बसे।
(संगीत धीमा, दिल को छूने वाला)
भीगी सड़कें, भीगे सपने,
तू था कहीं इन लम्हों में,
हवा में तेरी साँसें खोजूं,
खो जाऊँ तेरी बाहों में।
(संगीत गहराता, भावनाएँ उमड़ती हैं)
तूने छोड़ी वो हँसी जो,
आज भी मुझमें बसती है,
तेरी बातें, तेरी रातें,
हर सर्द बूँद में बहती हैं।
(संगीत मध्यम लय में बहता हुआ)
अगर कभी लौट आओगे,
इन बारिशों में खो जाओगे,
मेरी धड़कनें पहचानेंगी,
तेरी धड़कनों की आहट को।
(अंत में संगीत धीमा होता है, बारिश की हल्की आवाज़ के साथ)
रात की चादर में, चुपके से,
आई थी बारिश फिर से,
और बूँदों में तेरा अक्स,
फिर से मुझसे मिलने आया था…