"295" (Haryanvi Version – Unofficial)
Inspired by Sidhu Moose Wala's original lyrics
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(Intro – धीमे म्यूज़िक पे)
जो बोले सीधा-सच्चा,
उसके ऊपर केस बन जाए,
सिस्टम नै सच मंज़ूर ना से,
बस बात बात पे धारा लग जाए।
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(Verse 1)
बोलूं सच्चाई, तो चुभे किसी नै,
झूठा चमकता, सच्चा दबे किसी नै।
जैबां में आग, पर दिल साफ़ मेरा,
गांव का छोरा, पर सोच उंची से मेरा।
लिखूं हक की बात, वार का गीत ना,
कागज़ पे उतरूं, जंग की रीत ना।
मेरा कलम चले, तड़के की तरह,
पर सच पे चुप, यो सिस्टम की साजिश से डरे।
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(Hook / Chorus)
295 लगे सच्चा बोलण पे,
झूठा फिरे आज़ाद, ढोल बजा बाजण पे।
रेप करे बात की, गुनाह बिना खून के,
फिर भी केस लिखे, धारा बिना सबूत के।
295 लगे सच्चा बोलण पे,
सत्ता नै चुभे, ते फसाद होवे जोर से।
रे बंदूक ना चलाई, ना लूटा मैं कुण सा,
पर सच बोल्या, ते बन ग्या मैं गुनहगार सा।
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(Verse 2)
कहूं गरीबी, तो कहे तू भड़कावे,
जात की बात करूं, तो कहे तू बांटे।
हक की बात करूं, तो लगे नेता नै आग,
फिर कहे – इस नै पकड़ो, केस लगाओ आज।
म्हारा गीत ना कोई खून का खेल,
म्हारा गीत बस बोले जन जन की बेल।
गांव का छोरा, दिल से साफ,
पर सच्चा बोले तो सजा मिल जाए माफ।
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(Hook / Chorus Repeat)
295 लगे सच्चा बोलण पे,
झूठा फिरे आज़ाद, ढोल बजा बाजण पे।
रेप करे बात की, गुनाह बिना खून के,
फिर भी केस लिखे, धारा बिना सबूत के।
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(Outro – भावुक अंदाज़ में)
जो बोले सच, उसी पै तलवार चले,
बाकी सब चुप, बस देखे और जलें।
सिद्धू की बात, आज भी जिन्दा से,
हरियाणा भी बोले – "सच बोलण पै बंदा फसदा से।"
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