मुड़ के एक बार तक ले,
थोड़ी गल म्हारी कर लें,
ना तू दूर, ना मैं दूर सूं,
बीच में जिद खड़ी सै,
दूरी धीरे-धीरे घट ले,
चाहत दोनों की गहरी सै,
पहली पहल पर न्यु अडी सै,
अकड़ इश्क कें ठाँय खड़ी सै...
बात अधूरी ठहरी सै,
सांसां में आहट गहरी सै,
नैनां तर्पण की ऐठण सै,
होठां पे ना की पहरी सै,
जिद भी अपनी-अपनी सै,
चाहत दोनों की गहरी सै,
पहली पहल पर न्यु अडी सै,
अकड़ इश्क कें ठाँय खड़ी सै...
नैना-नैना इजहार करे सै,
अहंकार ना बाजी सै,
जिद तै छोटी रिश्ता भारी,
इश्क की यह बिमारी सै,
प्रेम में धीमी आँच भली सै,
चाहत दोनों की गहरी सै,
पहली पहल पर न्यु अडी सै,
अकड़ इश्क कें ठाँय खड़ी सै...
गलती मेरी, गलती तेरी,
आधा-आधा मोल करा लें,
दोनों ओर आग बराबर,
पहल पे बैठी राख सै,
हार-जीत की बात ना करिए,
चाहत दोनों की गहरी सै,
पहली पहल पर न्यु अडी सै,
अकड़ इश्क कें ठाँय खड़ी सै...
मान भी जा मैं तै मान लूं,
तेरा दर्द मैं तै जान लूं,
तू भी मेरा कंकड़ पढ़ ले,
मैं भी तेरा ठहराव जान लूं,
चुप्पी तै गवाही मिलदी,
जिद प्रेम की परछाई सै,
पहली पहल पर न्यु अडी सै,
अकड़ इश्क कें ठाँय खड़ी सै...
मनवा भीतर डर बैठ्या सै,
क्यूँ बाहर अकड़ दिखावै सै,
जो कहना सै प्यार में दोनों,
वो ना कोई बतलावै सै,
ताने में भी पीर बंधी सै,
रूठण में भी चाह छुपी सै,
पहली पहल पर न्यु अडी सै,
अकड़ इश्क कें ठाँय खड़ी सै...
रिश्ता कोई रण ना होवै,
हार-जित का खेल ना सै,
झुकणा अगर प्रेम बचावै,
अहम तै ऊंचा इश्क खड़ा सै,
जिद तै भारी यारी सै,
चाहत दोनों की गहरी सै,
पहली पहल पर न्यु अडी सै,
अकड़ इश्क कें ठाँय खड़ी सै...
आजा आधा तू समझा दे,
आधा तै मैं समझा जाऊं,
बोल दे बात बिगड़ै के सै,
चुप रह कै भी सुधरै के सै,
जिद छोटी, जज़्बात बड़े सै
मन तै मन की राह खुली सै,
पहली पहल पर न्यु अडी सै,
अकड़ इश्क कें ठाँय खड़ी सै...
चाहत दोनों की गहरी सै,
पहली पहल पर न्यु अडी सै,
अकड़ इश्क कें ठाँय खड़ी सै...