हाथी राजा कहां चले सूंड हिला कर कहां चले? मेरे घर भी आओ ना, हलवा-पूरी खाओ ना!
आओ बैठो कुर्सी पर, कुर्सी बोली चतर-पटर ! हाथी बोले - "मोटा हूं मैं, कुर्सी टूटेगी कहां दम मैं!"
बच्चे बोले - "डरो नहीं, हम रख देंगे गद्दा वहीं!" हाथी राजा हँसने लगे, धीरे-धीरे कुर्सी पे जमे।
हलवा-पूरी सामने आई, सूंड से थाली खींची भाई ! मज़ा आया हाथी को इतना, बोले - "अब तो रोज़ यहीं रुकना!"