[Verse]
उनसे जब मिला इक शाम मंहकती
बातें हुईं दिल से दिल की कहकती
वो हसती थी मैं भी हंस रहा था
जग से बेखबर संग देखता था
[Verse 2]
पहले ज़रा पहचान हुई यूँ
फिर वक्त के संग बनी बात यून
दिन का सबेरा रातें चमकती
हम-तुम की बातें दुनिया से हटती
[Chorus]
अब वो कहाँ है दिल को समझा लूँ
उनकी कमी में रातें काटूँ
वो क्यों चली गई इस दिल से
आँखें भी हैंगी पर मैं सच्चीं
[Verse 3]
बैठ कर सोचूँ उन लम्हों के बारे
जो खो गए हैं सदियों में साथ प्यारे
दिल को झूठा दिलासा देता हूँ
फिर भी हर पल उनकी बातें करता हूँ
[Bridge]
दिल पे लगा तीर दर्द से कराहता
यादों की आवाज़ दिल को पुकारता
यादें उनकी दिल पे वार करतीं
वो भी शायद याद करती
[Chorus]
अब वो कहाँ है दिल को समझा लूँ
उनकी कमी में रातें काटूँ
वो क्यों चली गई इस दिल से
आँखें भी हैंगी पर मैं सच्चीं