विदिशा की गलियाँ, धूल और धुआँ
कहते हैं विकास – कहाँ है वो भैया?
[Verse 1 – 30 सेकंड]
गड्ढों में सड़के, पानी भरा भारी
जनता की आवाज़ अब तक अनसुनी सारी
बोर्ड पर लिखा “स्मार्ट सिटी” का सपना
हक़ीक़त में टूटे रास्ते, मिट्टी का अपना
स्कूल के बच्चे भीगते हैं रोज़
नेताओं के वादे – बस चलते हैं रोज़
[Hook/Chorus – 20 सेकंड]
विदिशा की गलियाँ – गड्ढों से भरी
भ्रष्टाचार की हवा – हर ओर फैली पड़ी
हम उठेंगे आवाज़ – बदलाव की घड़ी
अब ना होगा धोखा – जनता की कसम बड़ी
[Verse 2 – 30 सेकंड]
ठेकेदार आए, फोटो खिंचवाए
चार दिन में सड़क – फिर ढह जाए
रिश्वत के चक्कर में लटक गया काम
जनता के टैक्स का गया क्या नाम?
युवा अब जागे – सोशल पे पोस्ट
भ्रष्टाचार रोको – यही है होस्ट
[Bridge – 15 सेकंड]
हमारे हक़ की आवाज़ बुलंद होगी
ईमानदारी की जीत, हर गली गूंजेगी
बच्चों के सपने ना टूटें यूँ ही
सड़कें बने मजबूत, हक़ मिलें सभी
[Hook/Chorus – 20 सेकंड]
विदिशा की गलियाँ – गड्ढों से भरी
भ्रष्टाचार की हवा – हर ओर फैली पड़ी
हम उठेंगे आवाज़ – बदलाव की घड़ी
अब ना होगा धोखा – जनता की कसम बड़ी
[Outro – 15 सेकंड]
विदिशा की गलियों में रौशनी लाएँगे
गड्ढों को भरकर नए रास्ते बनाएँगे
भ्रष्टाचार मिटे – यही हमारी पुकार
जनता की जीत हो – यही हमारा प्यार