शिखरों पर जहाँ ठंडी हवा बहती है,
तेरा नाम ही गूंजे, गगन कहती है।
ओ महादेव, तू प्रकाश निरंकार,
तू है सवेरा, तू ही अंधकार।
हर हर महादेव, दिल ये पुकारे,
अग्नि में, राख में, तुझको निहारे।
काल से परे, भय से परे,
हे शिव, मेरी आत्मा तुझे ध्यावे।
तेरी जटाओं से गंगा निकले,
फणि के कुंडल रहस्य को खोले।
डमरू की ध्वनि, जागे संसार,
तेरे चरणों में मिटे सब भार।
हर हर महादेव, दिल ये पुकारे,
अग्नि में, राख में, तुझको निहारे।
काल से परे, भय से परे,
हे शिव, मेरी आत्मा तुझे ध्यावे।
नीलकंठ, पी ले मेरा दुःख सारा,
तेरी ज्वाला में जले संशय सारा।
तेरी कृपा में मैं खो जाऊं,
सत्य का मार्ग तुझसे पाऊं।
कैलाश पुकारे, सितारे झुकें,
जहाँ नंदी खड़ा, वहाँ मन रुके।
हर सांस में तेरा नाम आए,
महादेव, मैं तुझमें समा जाऊं।
हर हर महादेव, मेरी आत्मा उड़ जाए,
तेरे प्रकाश में विलीन हो जाए।
बंधन से परे, भय से परे,
हे शिव, मेरा मन तुझे ध्यावे।
ॐ नमः शिवाय!