तेरी वो ख़ामोशी भी कुछ कहती है,
हर लम्हा तेरा एहसास छू जाता है।
तुम पास हो या दूर कहीं,
दिल मेरा बस तुम्हीं को पुकारता है।
तुमसे मिली ये राहत,
जैसे हो बरसात बादल की।
तुमसे जुदा ना होना,
ये दुआ है हर साँस की।
तेरी आँखों में जो खो जाऊं मैं,
समंदर की गहराई सा लगने लगे।
तेरी हँसी में जो पिघल जाऊं मैं,
हर दर्द मेरा मिटी सा लगे।
तुमसे मिली ये राहत,
जैसे हो बरसात बादल की।
तुमसे जुदा ना होना,
ये दुआ है हर साँस की।
रात की तन्हाई में, बस तेरा ही नाम लेता हूँ,
तुम हो तो हर ग़म से लड़ता हूँ।
तुमसे मिली ये राहत,
जैसे हो कोई अपनी बात।
तुम हो तो मैं हूँ,
वरना सब कुछ अधूरा सा लगता है।