श्रीसाई भजन
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मेरे साईं शिरडी वाले
मेरे साईं शिरडी वाले, मैं प्यार तेरा चाहूँ। दीदार तेरा चाहूँ, ऐतबार तेरा चाहूँ।
जपती हैं मेरी साँसें तेरे नाम की ही माला। तेरे अलावा साईं मेरा कौन है रखवाला। तुम्हें ढूँढ़ती निगाहें, मैं दीदार तेरा चाहूँ।
मेरे साईं शिरडी वाले...
तेरी भक्ति के अलावा कुछ जानता नहीं मैं। तेरी प्रीत के सिवा कुछ भी माँगता नहीं मैं ।। साईं भाव-वंदना का संसार तेरा चाहूँ।
मेरे साईं शिरडी वाले...
इस माया की नगरी में किसको सखा बनायें। अब किसको जाके साईं, अपना हाले दिल सुनाये ॥ सूनी है मेरी नौका, पतवार तेरा चाहूँ ॥
मेरे साईं शिरडी वाले...
कभी-कभी मूर्ख भी कुछ आत्मबोध के शब्द बोल जाता है।
किसी भी व्यक्ति की सभी आदतें बुरी नहीं होती।