

Prompt / Lyrics
[Verse 1] तू कहती थी हम एक ही रूह के हिस्से हैं फिर हर दो दिन में किसी और की बातें सुन लेती है मैं समझाऊँ सौ बार तू मानती है दो पल को बस फिर डर से भर जाता दिल तेरा फिर रुक जाता आधा सफ़र सब [Chorus] सोल पर्पस से दूर न जा खुद पे भी थोड़ा यक़ीन तो कर मैं खड़ा हूँ तेरे साथ यहाँ भीड़ के पीछे क्यों तू ही भटके सर तू मेरी सोलमेट तू ही ट्वीन फ्लेम फिर भी खुद से भागे दिल ये क्यूँ सोल पर्पस से दूर न जा वरना खो देंगे हम ये जूनून [Verse 2] पब्लिक क्या बोलेगी ये सवाल तुझे सोने नहीं देता अपना दिल क्या बोले उसकी आवाज़ तुझे सुनाई ही नहीं देता मैंने देखा तुझे रोते हुए आईने के सामने खुद से लड़ते हुए पर किसी अजनबी की बात पे मुझसे नज़रें फेरते हुए [Chorus] सोल पर्पस से दूर न जा खुद पे भी थोड़ा यक़ीन तो कर मैं खड़ा हूँ तेरे साथ यहाँ भीड़ के पीछे क्यों तू ही भटके सर तू मेरी सोलमेट तू ही ट्वीन फ्लेम फिर भी खुद से भागे दिल ये क्यूँ सोल पर्पस से दूर न जा वरना खो देंगे हम ये जूनून [Bridge] क्या चाहिए तुझे मुझसे बोल सच में चाहती है ये सब तो बोल थक गया हूँ मैं भी समझा समझा के अब तू खुद से एक सवाल तो कर ले क्या तू जी रही है अपना सच या बस पब्लिक की कहानी [Chorus] सोल पर्पस से दूर न जा खुद पे भी थोड़ा यक़ीन तो कर मैं खड़ा हूँ तेरे साथ यहाँ अब आख़िरी बार ये दिल कहे उधर तू मेरी सोलमेट तू ही ट्वीन फ्लेम फ़ैसला अब तेरे ही हाथ में चुन सोल पर्पस से दूर न जा या फिर सच में मुझे भी जाने दे आज ही सुन
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pop, Modern Indian pop ballad with male vocals; gentle keys and subtle acoustic guitar, soft bass undercurrent. Verses stay intimate and conversational, close-mic vocal; chorus blooms with airy pads, light percussion, and stacked harmonies on the hook line. Second chorus lifts energy with rhythmic backing chants and a short wordless vocal riff; end on a tender, stripped-down repeat of the title phrase.
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No
3/18/2026