[Verse 1]
रेत के समंदर में, चलती है एक कहानी,
तीन किनारे बोले, किसकी है सच्चाई?
सोने की चमक में, दर्द छुपा कहीं,
तकनीक की रौशनी में, साया बना यकीन।
[Chorus]
तीन किनारों की कहानी, कौन समझे किसकी ज़ुबानी,
एक में सौदा, एक में रोना, एक में जंग की निशानी।
तीन किनारों की कहानी, रेत में लिखी हुई रवानी,
कहीं दोस्ती, कहीं आग है, कहीं तन्हा इंसानी।
[Verse 2]
दुबई की मीनारें बोले, “हमने सपने बेचे हैं,”
अब्राहम के नाम पे, रिश्ते नए सींचे हैं।
इज़राइल की फैक्ट्री में, बनती हैं आँखें लोहे की,
पर किसको देखेगी, ये किसकी होगी सच्चाई?
[Chorus]
तीन किनारों की कहानी, कौन समझे किसकी ज़ुबानी,
एक में सोना, एक में आँसू, एक में जंग की रवानी।
[Bridge – Soft Qawwali feel]
सूडान की धरती चुप है, पर खून बोले सच्चा,
कहीं आरएसएफ़, कहीं सेना का क़हर कच्चा।
खाड़ी से आती है लहरें, सोने में भी धुआँ,
कहाँ गया वो इंसान जो, बोले “सबका जहाँ”?
[Breakdown – Whisper tone]
क्या तकनीक बिकती है, या इंसानियत?
क्या सौदा है रिश्तों का, या साज़िशों का सेट?
[Final Chorus – Emotional Rise]
तीन किनारों की कहानी, रेत में लिखी दीवानी,
कहीं फ़ायदा, कहीं दर्द है, यही दुनिया की निशानी।
तीन किनारों की कहानी, तन्हा सच्चाई पुरानी,
इंसानियत के सौदागर, कब जागेगी रवानी?
[Outro – Slow fade, soft music]
रेत के समंदर में…
तीन किनारे अब भी खामोश हैं…
बस लहरें पूछती हैं —
कौन सच्चा है, कौन झूठा… इस सहरा में?