धीमी गिटार की धुन और हल्की बारिश की आवाज़)
(Verse 1)
सफेद दीवारों के पीछे, आज वक्त थमा सा लगता है
जो कल तक मेरे साये थे, आज हर वो शभी लोग पराया लगता है
मैने मेरा ग्यान बाट के सिखाया ओर आज वही सब रील्स मे देख के सोच मे पड गये हे, आज वो रास्ता दिखाते हैं
मेरे ही अल्फाजों को बटोर कर, वो मुझे ही आइना दिखाते हैं।
(Pre-Chorus)
कहते हैं "दुनिया देख लो", जो कल तक घर की दहलीज न जानते थे
मेरी ही रोशनी में चमक कर, आज मेरी ही चमक को 'घमंड' मानते थे।
(Chorus)
सीखा मुझसे ही, और अब मुझे ही सिखाते हो
मेरे बुरे वक्त को, मेरी सजा बताते हो?
जब हम मिले थे, तब मजाक उड़ाया था तुमने
आज मैं शांत हूँ, तो उसे मेरा 'ईगो' बताते हो?
अजीब है ये दुनिया, और अजीब है ये लोग
खुद की भूल ओर भूल गए, मुझे समझाने निकले हो।
(Verse 2)
हॉस्पिटल के इस बिस्तर पर, शोर कम और खामोशी ज्यादा है
बाहर की दुनिया क्या है? ये मुझे सिखाने का उनका इरादा है
कहते हैं "तब क्यों नहीं सोचा, जब हंसते थे तुम सब पर"
अरे, वो खुशी थी मेरी, जिसे तुमने 'ऐटीट्युड' का नाम दिया जी भरकर।
(Bridge)
अंदर की दुनिया क्या है, वो मैं आज देख रहा हूँ
कौन अपना है, कौन पराया, हर चेहरे को लिख रहा हूँ
गलती उनकी नहीं, शायद मेरी ही तालीम में कोई कमी थी
मैने जिन्हें समंदर दिया, उनकी आंखों में सिर्फ नमी थी।
(Verse 3 - भारी आवाज़ में)
हाँ, मैं शांत हूँ आज, क्योंकि जवाब देने की अब हसरत नहीं
तुम्हारी कड़वी बातों से, मुझे अब कोई शिकायत नहीं
तुम कहते हो घमंड है मुझमें, चलो यही सही
पर कम से कम, तुम्हारी तरह पीठ पीछे खंजर तो नहीं।
(Guitar Solo - दर्द भरी और ऊँची धुन)
(Chorus - Repeat)
सीखा मुझसे ही, और अब मुझे ही सिखाते हो
मेरे बुरे वक्त को, मेरी सजा बताते हो?
अजीब है ये दुनिया, और अजीब है ये लोग
खुद की भूल ओर भूल गए, मुझे समझाने निकले हो।
(Outro - धीमी होती आवाज)
हॉस्पिटल की ये रातें कट जाएंगी...
मेरी खामोशी का जवाब, खुद वक्त ही लाएगा...
जिन्होंने कल मजाक उड़ाया था...
वक्त उन्हें भी, एक दिन तुमको भी केन्सर करके आईना दिखाएगा।
(Fade out...)