

Prompt / Lyrics
[Intro] (हल्की इलेक्ट्रिक पियानो की धुन और चुटकियों की आवाज़... बैकग्राउंड में एक गहरी हमिंग...) धड़कनों की खामोशी ओह...ओह...हम्म...हम्म... आ... सिर्फ तुम और मैं...सपनो मे... वक्त को यहीं ठहर जाने दो। [अंतरा 1] ओह...ओह...दीवार पर टिकी घड़ी की सुइयां, अब शोर नहीं करतीं तेरी साँसों की जो लय है, वो कभी कम नहीं पड़ती। बाहर की दुनिया का सारा शोर, मैंने पीछे छोड़ दिया तेरी आँखों में डूबकर, मैंने खुद से नाता जोड़ लिया। हम्म...हम्म...ओह...ये जो हल्की सी रोशनी है, तेरे चेहरे पे सजी जैसे मेरे दिल के सूने आँगन में, कोई शहनाई बजी। [Pre-Chorus] ये वो फ्रीक्वेंसी है, जिसे हम दोनों जानते हैं आ... हम दोनों ही एक-दूजे को खुदा मानते हैं। क्या तुम महसूस कर रही हो? (हाँ) इस गरमाहट को... इस सुकून को... मेरी ज़िंदगी की अधूरी धुन, अब तुम में ही है। ओह... [Chorus - मुखड़ा] तो चलो धीरे-धीरे बहते हैं,जज्बातों के इस समंदर में जैसे कोई दरिया मिल जाए,आधी रात के मंज़र में। अल्फाज़ों की ज़रूरत क्या, धड़कनों को बोलने दो इश्क सबसे ऊँचा होता है, जब हम खामोश होते हैं। ये R&B वाली रूह है, जो हमें संभाल रही है तुम वो हिस्सा हो मेरा, जो मुझे मुकम्मल कर रही है। [अंतरा 2] तुम्हारी हथेलियों की लकीरों को, मैं नक्शा बना लूँ मैं अपनी मंज़िल को, बस तुम्हारी बाहों में पा लूँ। ओह... तेरी खुशबू हवाओं में, एक मीठा सा नशा है हम्म... हर तरफ बस तू ही तू, ये कैसी वफ़ा है? याह... हमें महफ़िल नहीं चाहिए, ना कोई रोशनी का घेरा मेरे अंधेरों में बस, तेरा ये प्यार है सवेरा। [Chorus - मुखड़ा] तो चलो धीरे-धीरे बहते हैं, हम्म...जज्बातों के इस समंदर में... जैसे कोई दरिया मिल जाए, आधी रात के मंज़र में। अल्फाज़ों की ज़रूरत क्या, ओह...धड़कनों को बोलने दो... आ...इश्क सबसे ऊँचा होता है, जब हम खामोश होते हैं। [Bridge - जोड़] (संगीत थोड़ा धीमा हो जाता है, बस एक गहरी बेस (Bass) की आवाज़...) ओह...याह...आ... और अगर कल ये सूरज, निकलना भूल जाए... तो मुझे फर्क नहीं पड़ेगा, चाहे दुनिया ही रूठ जाए। (आलाप: ओ... फ़र्क नहीं पड़ेगा...) क्योंकि तेरी ये गर्माहट, अंधेरों को चीर देती है तेरी एक मुस्कान, ज़िंदगी को जागीर देती है। (यहाँ एक लंबा सैक्सोफ़ोन या गिटार सोलो चलेगा - लगभग 1 मिनट के लिए) हाँ, ये प्यार की आग है... इसे धीरे-धीरे जलने दो... [मुखड़ा] तो चलो धीरे-धीरे बहते हैं, जज्बातों के इस समंदर में... जैसे कोई दरिया मिल जाए, आधी रात के मंज़र में। अल्फाज़ों की ज़रूरत क्या, धड़कनों को बोलने दो... इश्क सबसे ऊँचा होता है, जब हम खामोश होते हैं। [समापन] ओह...याह... हाँ... बस यहीं रहो। हिलना मत। ये खामोशी कितनी खूबसूरत है... (बैकग्राउंड आवाज़: खामोशियां... ये खामोशियां...) धीरे से... बस ऐसे ही। ओह मेरी जान... (पियानो की गुज)
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male,SoftR&B,Soul,Slospeed,Romantic,Softsynths,deepbass,rhythmicfingersnaps,ContemporaryR&B,Soul
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No
3/23/2026