खोला नकाब तो निकला ये शेर
ताने जो मारे, कितने हुए ढेर
कहां का लड़का, कौन शहर
मेरे कलम चले , उगले जहर
कलाकारी top पे,,
अपना ही खोप है
मेरा vars भारी ,, सारे ye NOK है
संघर्ष है जिंदगी,, कोई मजाक नहीं,,
खुदा के घर पर देर है अंधेर नहीं
** मनोरा के लड़के, सबसे हटके,, मारते कम सीधे का घसीटे,, बातें बनाते नहीं,, सर से धड़ अलग एक ही झटके,,
हर जगह मेरी बातें चले,,
देख के लोगो के मस्तिक जले
प्यार में थोड़े से दिलजले,,
हिम्मत है काफ़ी, दोस्त रूप में भाई मिले