वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि सम प्रभा,
विघ्न हरन मंगल करता, भक्तों का तू सहारा॥
ध्यान तेरा जो धरता है, उसका जीवन सँवरता है,
जय गणपति दयालु देवा, हर दिल में तू बसता है॥
मूषक वाहन साथ सवारी, लड्डू तेरा भोग,
सिंदूरी रंग भाल पे तिलक, गजमुख सुंदर योग॥
तेरी कृपा से चलता जीवन, तुझसे ही तो रोशनी है,
हे गणराज विध्न विनाशक, तू ही सच्ची ज्योति है॥
ओम गं गणपतये नमः, यह मंत्र जो जपे,
हर कष्ट मिटे, सुख बढ़े, सौभाग्य हर पल छपे॥
शिवसुत तू, पार्वती नंदन, ज्ञान तेरा अमूल्य है,
बुद्धि-बल-विद्या के दाता, तेरा नाम अनमोल है॥
आ जा मेरे अंगना में, गणराज विराजो,
कर दो जीवन शुभ मेरा, मन मंदिर में आजो॥
आरती तेरी उतारूँ मैं, दीप जलाऊँ प्रेम से,
हे गणेश गोरी के लाला, रक्षा कर तू नेह से॥