मेरे भविष्य का मैं
सूरज की पहली किरणों में,
जब मैं देखूं अपने आप को,
सपनों का दरिया बहता,
हर लहर में छिपा है एक राज़।
मैं वो हूँ, जो कभी डर गया था,
जो खुद से हार मानकर,
छोटे रास्तों पर चल पड़ा था।
पर अब,
जब मैं सोचता हूँ,
मेरे भीतर की आग जल उठी है,
हर ठोकर, हर गिरावट,
मेरे सांचे में ढल गई।
मैंने सीखा, हिम्मत से चलना,
हर मुश्किल को गले लगाना।
आगे बढ़ते हुए,
आसमान की ऊँचाई छूने की चाह में,
मैं जानता हूँ,
हर कदम पर है एक नया सबक।
खुद को पहचानने का सफर,
हर दिन एक नई कहानी लिखता।
मैंने सीखा है,
सपने वो नहीं जो सोते वक्त में आते,
सपने वो हैं,
जो हर सुबह मुझे जगाते हैं।
मैं वो भविष्य हूँ,
जिसने खुद को गले लगाया,
जो कभी खुद को खो चुका था,
अब खुद को पा लिया।
चलो, हाथ में हाथ डालकर,
आगे बढ़ें,
हर मुश्किल को चुनौती दें,
क्योंकि मैं जानता हूँ,
मेरे भीतर है वो शक्ति,
जो पूरे आसमान को छू सकती है।
जब मैं देखूंगा अपने भविष्य को,
मुस्कुराहट के साथ,
सपनों की नई शुरुआत के साथ,
क्योंकि मैं वो हूँ,
जो आज की मेहनत से,
कल की खुशियों का रास्ता बनाता।.