[Intro – धीमे सुर में]
सुन ओ दुनिया, अब खामोश न रहेगा ये आवाज़,
गाँव की मिट्टी से उठी है अब सच की ये आवाज़...
[Verse 1]
मैं श्याम मकरो से, बलरामपुर की शान,
सच्चाई के संग, ना कोई झूठी पहचान।
खेती की जमीन से निकला सीधा दिल से,
झूठ के बाजार में मैं खड़ा अपनी सच्ची फिल से।
राजनीति हो या सिस्टम की चाल,
हर जगह बिकती है सच्चाई बेहाल।
पर हम न झुकेंगे, न रुकेंगे, ना बिकेंगे,
हर एक जुल्म पे सवाल उठाएंगे, लिखेंगे।
[Hook – Repeat 2x]
सच की आवाज़ हूँ, ना कोई डर है मुझमें,
हर झूठ का जवाब है, ये ज्वाला सुलगे दिल में।
भीड़ में नहीं खोया, मैं वो अलग आवाज़,
जो सन्नाटों को तोड़े, ये है सच की आवाज़।
[Verse 2]
हर खेत, हर गली, हर नुक्कड़ पे बोलूँ,
जो चुप थे अब तक, अब उनके हक़ में डोलूँ।
न्याय की मशाल लिए चल पड़ा हूं मैं,
हक़ की लड़ाई में अब जल पड़ा हूं मैं।
ना नेता, ना अभिनेता – मैं जनता की बात,
जो छुपा है पर्दे पीछे, अब करूँ मैं उजागर हर बात।
सोशल मीडिया पे नहीं सिर्फ दिखावे की बात,
दिल से निकले बोल मेरे – हक़ की सौगात।
[Hook – Repeat 2x]
सच की आवाज़ हूँ, ना कोई डर है मुझमें,
हर झूठ का जवाब है, ये ज्वाला सुलगे दिल में।
भीड़ में नहीं खोया, मैं वो अलग आवाज़,
जो सन्नाटों को तोड़े, ये है सच की आवाज़।
[Outro]
श्याम नाम है मेरा, आवाज़ बना अंगारा,
जहाँ झूठ का अंधेरा, मैं बना उजियारा।
माकरो से चला, अब दिलों में बसा,
ये सच की आवाज़, अब कभी न रुकेगा!