काम पे जाना, घर आना
बच्चों के संग मस्ती करना
खाना खाना, सो जाना
ये ही तो है रोज़ का फ़साना
(Verse 1)
सुबह उठकर जल्दी जाना
ऑफिस का सारा काम निपटाना
फिर शाम को घर लौट आना
बच्चों को गोद में उठाना
(Chorus)
काम पे जाना, घर आना
बच्चों के संग मस्ती करना
खाना खाना, सो जाना
ये ही तो है रोज़ का फ़साना
(Verse 2)
उनकी प्यारी-प्यारी बातों में खो जाना
खेल-खिलौनों से उनको बहलाना
फिर मिलकर हम खाना खाना
और प्यार से सबको सुलाना
(Chorus)
काम पे जाना, घर आना
बच्चों के संग मस्ती करना
खाना खाना, सो जाना
ये ही तो है रोज़ का फ़साना
(Outro)
यही है जीवन की गाड़ी चलाना
हर पल को खुशी से बिताना
काम और परिवार को साथ निभाना
यही है अपना रोज़ का फ़साना