तेरे बिना अधूरा हूँ मैं,
जैसे रात बिना चाँदनी।
हर सांस में बसी है तू,
जैसे फूलों में हो रागिनी।
तेरी हँसी है जादू सा,
हर दर्द को मिटा देती है।
तू साथ हो तो लगता है,
ये दुनिया भी हँस देती है।
ओ जान-ए-जिगर, तेरा ही असर,
दिल ये मेरा अब बस तुझ पे ही मर।
तेरे बिना सब सुनसान लगे,
तू जो मिले तो जहान लगे।
तेरे ख्यालों में खोया हूँ मैं,
जैसे बारिश में भीगा सपना।
तेरे बिना हर लम्हा लगा,
जैसे वक्त ने थमा है अपना।
तेरी बातें जैसे कविता सी,
हर अल्फाज़ में मधुरता है।
तू दूर रहे फिर भी लगे,
तेरी रूह मेरे संग चलता है।
ओ जान-ए-जिगर, तेरा ही असर,
दिल ये मेरा अब बस तुझ पे ही मर।
तेरे बिना सब सुनसान लगे,
तू जो मिले तो जहान लगे।
अगर तुझसे जुदा हो जाऊँ,
तो सांस भी तनहा हो जाए।
तेरी बाहों में ही मिलती है,
जो सुकून सारी दुआए